अगले साल से मेट्रो जैसी स्टेनलेस स्टील की भी होंगी रेलवे की ट्रेनें

January 20, 2018, 1:51 PM
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चेन्नै -अब जल्द ही रेलवे की पटरियों पर भी मेट्रो की तरह स्टेनलेस स्टील से बनी ट्रेनें दौड़ती नजर आएंगी। इसकी शुरुआत चेन्नै स्थित रेलवे कोच फैक्टरी में हो गई है। उम्मीद की जा रही है कि पहली ट्रेन इसी साल जून तक बनकर तैयार हो जाएगी, लेकिन चूंकि उसके बाद इसकी सेफ्टी से जुड़ी कई तरह की मंजूरियां ली जानी हैं, इसलिए माना जा रहा है कि ऐसी पहली ‘मेट्रो’ ट्रेन अगले साल जनवरी तक इंडियन रेलवे चलाने लगेगा।

रेल कोच फैक्टरी के जनरल मैनेजर एस. मणि के मुताबिक, हालांकि यह पहली ट्रेन कोच फैक्टरी में ही बनाई जा रही है, लेकिन इससे आगे अब ऐल्युमिनियम से बनने वाली ट्रेन की भी तैयारी की जा रही है और इसकी टेंडर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। रेलवे की योजना है कि ऐल्युमिनियम की बनी ये ट्रेनें शुरू में किसी इंटरनैशनल फर्म से खरीदी जाएं। उम्मीद की जा रही है कि इन ट्रेनों को भी जल्द ही भारत लाया जाएगा।

मेट्रो ट्रेनों के मुकाबले बेहतर

कोच फैक्टरी के अधिकारियों का कहना है कि स्टेनलेस स्टील की जो ट्रेन रेलवे की फैक्टरी में बनाई जाएगी, उसका सारा मटीरियल दूसरी कंपनियों से खरीदा जा रहा है। यह ट्रेन कई मायनों में मेट्रो ट्रेनों के मुकाबले बेहतर होगी। मसलन, मेट्रो के लिए जो ट्रेनें बनाई जाती हैं, वे अधिकतम 80 या 90 किमी की स्पीड से दौड़ सकती हैं लेकिन, रेलवे जो ट्रेन बना रहा है, उनकी स्पीड 176 किमी प्रति घंटा होगी। हालांकि, जब रेलवे चलाएगा तो इसकी स्पीड कम होगी। ये ट्रेनें 160 किमी की स्पीड से दौड़ सकेंगी, लेकिन चूंकि यहां सभी जगह 160 किमी की स्पीड से चलने वाला ट्रैक नहीं है, इसलिए इनकी स्पीड को कम रखा जाएगा।

स्पीड ज्यादा, कई सुविधाएं भी

इन ट्रेनों का फायदा यह होगा कि ये राजधानी और शताब्दी से कुछ ज्यादा स्पीड पर चलेंगी। इसके अलावा चूंकि इन्हें रोकने और फिर स्पीड पकड़ने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा, इसलिए इन ट्रेनों से सफर में लगने वाले वक्त में कमी आएगी। मेट्रो की तरह ही इस ट्रेन में भी पहले और अंतिम कोच में इंजन होगा, यानी ड्राइवर इस ट्रेन को दोनों ओर से ऑपरेट कर सकेगा। इस ट्रेन में मेट्रो की तरह साइड में सीटें नहीं होंगी, बल्कि इनमें मौजूदा राजधानी और शताब्दी की तरह की सीटें लगाई जाएंगी। यही नहीं, इसमें वाई-फाई की सुविधा के अलावा वैक्यूम टॉइलेट भी दी जाएगी। यही नहीं, जो सीटें लगेंगी, वह पूरी तरह से घूम सकेंगी।

Source – Navbharat Times

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