दिल्ली: भीषण सर्दी में खुले आसमान के नीचे सो रहे लोग

January 9, 2018, 3:09 PM
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नई दिल्ली: भीषण सर्दी में लोगों का घरों में रहना मुहाल हो रहा है, लेकिन इसी हाड़ कंपाती ठंड में सैकड़ों लोग राजधानी की सड़कों पर खुले आसमान के नीचे सो रहे हैं। ठंड से मौत को लेकर इन दिनों दिल्ली की राजनीति गरम है, लेकिन जिम्मेदार लोगों और सरकार को इस हकीकत को भी देखना चाहिए। राजधानी के फ्लाईओवर, फुटपाथों पर रात के वक्त सोते हुए लोग बड़ी संख्या में दिखाई दे रहे हैं। इनमें कुछ जानबूझकर सोते हैं, कुछ मजबूरी में एम्स के सामने तो बड़ी संख्या में लोग खुले में सोते हैं। इनमें से अधिकतर लोगों की आर्थिक रूप से कमजोरी ही कारण होती है। खुले में सोने वालों में महिलाएं, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चे तक शामिल हैं। सोमवार की रात को जब राजधानी का दौरा किया गया तो मध्य दिल्ली के अरुणा आसिफ अली मार्ग, पुरानी दिल्ली रलवे स्टेशन, यमुना बाजार हनुमान मंदिर, विकास मार्ग, अक्षरधाम मंदिर, मिंटो रोड, आनंद विहार रेलवे स्टेशन, शाहदरा रेलवे स्टेशन पर लोग खुले में सोते दिखाई दिए।

रैन बसेरे में नहीं मिलती सोने की जगह
यमुनाबाजार, मजनू का टीला के पास स्थित रैन बसेरे के बाहर सो रहे रमजान ने कहा कि रैन बसेरे में जगह नहीं है। सर्दी बढ़ते ही वह भर जाता है। जब भीतर जगह नहीं मिलती तो मजबूरी है बाहर सोना पड़ता है।

रैन बसेरे में होती है चोरी
मोहम्मद शाहिद ने बताया कि रैन बसेरों में चोरी होती है। कभी हमारे कंबल चोरी हो जाते हैं तो कभी रुपए, जिसकी वजह से हम लोग फुटपाथ पर ही सोना पसंद करते हैं।

कंबल के लिए भी सोते हैं खुले में
रात के समय लोग कंबल बांटने निकालते हैं। इसी कारण कुछ लोग खुले में रात बिताते हैं। बाबा खडग़ सिंह मार्ग पर रात के समय सड़क किनारे परिवार के साथ बैठे चंगा ने बताया कि उनको रात भर में दस-बारह कंबल मिल जाते हैं। इसके साथ तीन-चार सौ रुपए भी मिल जाते हैं। इसी कारण वह लोग रात को सड़क किनारे बैठते हैं।

आधार कार्ड नहीं तो सोने की जगह नहीं मिलती
यमुना बाजार हनुमान मंदिर स्थित फुटपाथ पर एक ही जगह पर सोने वाले लोगों ने बताया कि रैनबसेरों में काफी दिक्कत है। कोलकता निवासी आसमा परवीन ने बताया कि मेरा आधार कार्ड नहीं बना हुआ है, जिस कारण मुझे रैनबसरे में प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। मैं कई बार आधार कार्ड के लिए जा चुकी हूं, लेकिन नहीं बना।

एम्स के बाहर हालात बहुत बुरे
एम्स में देशभर से लोग इलाज कराने के लिए पहुंचते हैं। यहां पर सर्द रात में बड़ी संख्या में लोग सोते हुए दिखाई देते हैं। ज्यादातर लोगों की मजबूरी में ही खुले आसमान के नीचे सोते हैं। कंबल आदि के ऊपर पॉलीथिन ओढ़कर रात बिताते हैं। चार साल से एम्स के बाहर सड़क पर रहने वाले शमीम ने कहा कि वह मजदूरी करता है और फुटपाथ पर सोता है।

Source – Punjab Kesari

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