May 20, 2013

Workers against ICF sharing know-how with private players

A Railway Board directive to the Integral Coach Factory (ICF) to share its coach manufacturing know-how free of cost with private players has upset workmen, who feel it is against public interest and amounts to a sell-out of ICF’s mandate as a premier supplier of coaches to the Railways.

The Railway Board’s February 13 circular to the General Managers of ICF, Chennai, and the Rail Coach Factory, Kapurthala, on “transfer of design drawings” to contracting firms had triggered a tool-down strike on March 6 for a few hours.

The protest was spearheaded by a Joint Action Council (JAC) formed on behalf 12,000 ICF employees represented by an elected 12-member Staff Council. It demanded that the Board’s decision be immediately withdrawn.

The strike was called off based on an assurance from the administration that ICF’s intellectual property and its workmen’s interests would be protected.

However, with the Railway Board again showing keenness on pushing the project through, JAC sources say workmen would return to the warpath. “Our stand is unchanged. As the Board has offered a second round of consultation, we have deferred direct action until then,” an ICF Staff Council member said.

Documents available with The Hindu show how the Rs. 610-crore deal provides five contracting firms free access to ICF’s technical repository of coach design and drawings and is tilted in favour of these companies assigned to manufacture over 400 coaches.

Kolkata-based Titagarh Wagons Ltd. will manufacture 99 AC EMU coaches, BESCO eight MEMU coaches, and Jessop 59 AC EMU coaches while the only public sector undertaking in the list, Bharat Earth Movers Ltd., Bangalore, has been assigned two contracts -- one for the manufacture of 72 AC EMU coaches and another for 160 DEMU coaches.

Under the terms and conditions, the ICF would formalise an agreement to hand over design and drawings free of cost.

The ICF had paid Rs. 160 crore for getting LHB design know-how from a German manufacturer 10 years ago. The firms would only bear costs such as “incidental expenses connected with the preparation and printing of drawings,” registration fees and stamp duties.

Further, according to clause 6 of the contract, Indian Railways would provide steel raw material, wheel set assembly and electric traction equipment to the contractor’s work siding or the railway station nearest to the work site. Even when this is the case, the contract incorporates a “price variation” provision by which the Railways would also shell out the differential in price escalation of material and labour costs to the contracting firm.

“You outsource to lower costs. But, here the Railways will be spending at least Rs. 120 crore more than ICF costs when just a fraction of that money would have been enough to scale up production at existing coaching units at Chennai, Kapurthala and Raebareli,” an ICF supervisor said.

The Railway Board did not respond to The Hindu’s e-mail request for clarification on these issues.

Earlier this month, the Board’s bid to sort out the issue through consultations failed to cut ice with ICF workmen.

On May 4, a delegation of top Board officials held a meeting with the administration and representatives of workers.

“None of the officials could dispute our contention that no public interest is served by this contract,” said a JAC member who attended the meeting. As none of the firms other than BEML had turn-key coach manufacturing units, it was unlikely that they would be able to deliver coaches within three months of placement of order.
Source - THE HINDU

Special train to Secunderabad


Special trains will be run between Visakhapatnam and Secunderabad in view of summer vacation, Senior Divisional Commercial Manager of Waltair Division M. Yelvender Yadav said on Saturday.

Special train No.07103 leaves here at 7.05 p.m. on Mondays - May 20 and 27 reaches Secunderabad at 8.25 a.m. on Tuesdays while special train No. 07104 leaves Secunderabad at 9 p.m. on Sundays - May 19 and 26 and arrives here at 8.50 a.m. on Monday.

The special trains stop at Kazipet, Warangal, Khammam, Madhira, Vijayawada, Eluru, Tadepalligudem, Rajahmundary, Samalkot, Annavaram, Tuni, Anakapalle and Duvvada stations in both directions. The trains consist of one AC II Tier, one AC III tier, eight sleeper, six general second class coaches and two second class sitting-cum-luggage van coaches.

Source - The Hindu

और सुहाना होगा मेट्रो का सफर

मेट्रो में सफर करने वालों के लिए खुशखबरी। पहले व दूसरे चरण के दौरान तैयार छह मेट्रो लाइन में से तीन भीड़भाड़ वाले लाइन पर फरवरी 2014 तक सभी ट्रेन आठ कोच वाली दौड़ने लगेंगी। सबसे पहले लाइन संख्या दो (जहांगीरपुरी से हुडा सिटी सेंटर) पर दौड़ रही छह कोच वाली ट्रेनों को आठ कोच वाली ट्रेनों में तब्दील किया जाएगा। फिर लाइन संख्या तीन (द्वारका से नोएडा) और उसके बाद लाइन संख्या चार (यमुना बैंक से वैशाली) पर दौड़ रही छह कोच वाली ट्रेनें जल्द ही अतीत की बात हो जाएगी।

तीनों मेट्रो लाइन पर फिलहाल चार कोच वाली ट्रेनें दौड़ रही हैं, उसे जुलाई तक छह कोच वाली मेट्रो में तब्दील कर दिया जाएगा। इसके बाद सभी छह कोच वाली मेट्रो ट्रेन को आठ कोच में तब्दील करने की कवायद शुरू हो जाएगी। मेट्रो प्रवक्ता अनुज दयाल के अनुसार, तीनों लाइनों पर यात्री संख्या में हो रहे इजाफे को देखते हुए काफी समय से कोशिश की जा रही थी कि आठ कोच वाली ट्रेनें ही चलाई जाएं। अब जाकर मेट्रो कोच निर्माता कंपनियों ने निर्धारित समय पर कोच उपलब्ध कराने का आश्वासन दे दिया है, इसलिए तीनों लाइन पर अगले साल फरवरी तक आठ कोच वाली मेट्रो ट्रेन दौड़ाने का लक्ष्य रखा गया है। इस बारे में पिछले दिनों संसद में भी जानकारी मांगी गई थी, जो हमने उपलब्ध करा दी।

मेट्रो अधिकारी बताते हैं कि अतिरिक्त कोच वाली मेट्रो चलाने की बात को लेकर डीएमआरसी ने सर्वे किया था। इसमें सबसे पहले जहांगीरपुरी से हुडा सिटी सेंटर लाइन पर आठ कोच वाली मेट्रो ट्रेन चलाने की जरूरत महसूस हुई। इसे देखते हुए डीएमआरसी ने पहले इस लाइन पर चलने वाली ट्रेन को आठ कोच से लैस करने का निर्णय लिया। यह भी ध्यान में रखा जाएगा कि सफल परिचालन के लिए न केवल ट्रैक पर नियमित अंतराल पर दौड़ने वाली मेट्रो ट्रेन की संख्या पर्याप्त हो। साथ ही डिपो में भी अतिरिक्त ट्रेन होना अनिवार्य है ताकि तकनीकी खराबी के चलते लाइन पर चलने वाली ट्रेनों की संख्या कम पड़ जाए तो अतिरिक्त ट्रेनों की सेवा ली जा सके। मेट्रो प्रवक्ता के अनुसार, बेड़े में शामिल होने वाली अतिरिक्त कोच का परीक्षण चल रहा है, महीने भर के परीक्षण के बाद इसे ट्रैक पर उतार दिया जाता है। मालूम हो कि पहले व दूसरे चरण के तहत तैयार मेट्रो स्टेशन पर अधिकतम आठ कोच वाली मेट्रो ट्रेन चल सकती है।

मेट्रो पर एक नजर

दिल्ली-एनसीआर में मेट्रो का जाल - 190 किलोमीटर

कुल मेट्रो स्टेशन की संख्या - 135

प्रतिदिन यात्रियों की आवाजाही - 19-20 लाख

सभी लाइनों पर दौड़ने वाली मेट्रो ट्रेन की कुल संख्या - 160
Source - Jagaran

तत्काल: एक दिन पहले की कतार ख़त्म होने से पहले ही लग जाती है अगले दिन की लाइन!


जयपुर.आजकल छुट्टियां चल रही हैं और छुट्टियां खत्म होने तक शायद ही किसी ट्रेन की किसी भी श्रेणी में कोई सीट उपलब्ध हो। ऐसे में तत्काल के लिए अफरातफरी स्वाभाविक है, लेकिन कितनी! सोमवार की यात्रा के लिए रविवार को टिकट लेने के लिए लगे लोगों की लाइन अभी खत्म भी नहीं होती कि मंगलवार का टिकट लेने के लिए भी लोग साथ ही कतार में लग जाते हैं। ऐसे में एक टिकट के लिए औसतन लोगों को 20-20 घंटे तक कतार में लगना पड़ रहा है। 

जयपुर का अधिकतम तापमान लगातार दूसरे दिन 44.6 डिग्री ही रहा। ऐसे में भी दोपहर में ही अगले दिन के लिए लाइन लग रही है। लोग पूरी रात सड़क पर बिता रहे हैं। लाइन की व्यवस्था भी खुद यात्रियों ने ही लागू कर रखी है। पर्ची पर लिखे नंबर से ही काम नहीं चलता, पर्ची की रातभर हिफाजत भी करनी पड़ती है। भास्कर टीम ने शनिवार रात को जयपुर जंक्शन, गांधीनगर व दुर्गापुरा स्टेशनों के बाहर और अंदर की स्थिति की पड़ताल की। 
बुकिंग खुलने के दो मिनट के अंदर वेटिंग खत्म
रेलवे एजेंटों की मानें तो कुछ ट्रेनों में तत्काल की बुकिंग दो मिनट के अंदर ही खत्म हो जाती है। ऐसा मुंबई, पटना में एक विशेष प्रकार के साफ्टवेयर के कारण है, जिससे बुकिंग खुलते ही टिकट निकल जाते हैं। ऐसे में काउंटरों पर रातभर कतार में लगने वालों को भी वेटिंग ही मिलती  है। इनमें भी खासकर दिल्ली-गुवाहाटी, दिल्ली-पटना राजधानी, विक्रमशिला, जयपुर-चेन्नई एक्सप्रेस आदि ट्रेनें शामिल हैं। 
रेलवे का कहना, स्पेशल ट्रेनों की जानकारी नहीं होने से परेशानी 
'गर्मियों में यात्रियों की ज्यादा संख्या को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने 22 स्पेशल ट्रेनें चलाई हैं, पर यात्रियों को इसका पता नहीं रहता। इस कारण वे रेगुलर ट्रेन में तत्काल टिकट लेना चाहते हैं। यात्रियों को चाहिए कि वे टिकट लेने से पहले स्पेशल ट्रेन की जानकारी भी प्राप्त कर लें।'
-तरुण जैन, सीपीआरओ, उत्तर पश्चिम रेलवे 
जयपुर जंक्शन
शनिवार रात 11:10 बजे :  
आरक्षण कार्यालय का मुख्य गेट बंद, बाहर टिकट लेने वाले बैठे हैं। पहले नंबर पर बैठे मुर्तजा अंसारी बिहार के रहने वाले हैं। उन्हें कटियार जाने के लिए तत्काल टिकट चाहिए। अंसारी ने बताया कि वे दोपहर करीब 2 बजे ही यहां आकर बैठ गए थे। दूसरे नंबर पर बैठे विकास सोलंकी झुंझुनूं के रहने वाले हैं और बेंगलुरू का टिकट लेने आए हैं। वे शाम 4:30 बजे से यहां बैठे हैं।
रात 3:45 बजे :  तत्काल टिकट के लिए लोग एक पर्ची में अपना नंबर लगाते हैं। इस समय तक 90 लोग पर्ची में दर्ज हो चुके हैं,  22वें नंबर पर अनूप कुमार पर्ची चेक करते हैं, कि कहीं कोई वापस तो नहीं चला गया। मुख्य गेट के बाहर बैठे लोग सड़क पर ही सो रहे हैं।
रविवार सुबह 5:20 बजे :  इस समय तक पर्ची में 106 लोगों के नाम दर्ज चुके थे। अनूप  ने बताया कि इस संख्या के बाद लोगों ने पर्ची में नाम लिखना बंद कर दिया था। वे वैसे ही खड़े हो गए। यहां आरक्षण कार्यालय के मुख्य गेट से स्टेशन के अंदर की तरफ लगी रेलिंग के सहारे तत्काल आरक्षण की लंबी लाइन लग चुकी थी। 
सुबह 6 बजे :  आरक्षण कार्यालय का मुख्य गेट खुलता है तो वहां खड़े सभी लोग अंदर वाले गेट के बाहर लाइन लगा लेते हैं। महिला-पुरुषों की अलग-अलग लाइन। इस दौरान कुछ लोगों का नंबर आगे-पीछे हो जाता है। इस कारण तनातनी भी होती रहती है।  
सुबह 8 बजे :  आरक्षण कार्यालय के हॉल का गेट खुलता है। वहां मौजूद रेलवे का एक कर्मचारी लोगों को बारी-बारी से टिकट खिड़की पर भेजता है। शनिवार दोपहर 2 बजे से बैठा अंसारी भी एक खिड़की पर 1 नंबर पर आया। तीसरे नंबर पर लाइन में खड़ी एकता को भी एक अन्य खिड़की पर एक नंबर मिला। अनूप कुमार को एक अन्य खिड़की पर 5वां नंबर मिलता है।  ठीक 10 बजे तत्काल टिकट मिलना शुरू हो जाते हैं।
दुर्गापुरा रेलवे स्टेशन 
शनिवार रात 10:20 बजे : टिकट खिड़की पर एक पर्ची रखी है, जिसमें पहले नंबर पर दुर्गापुरा निवासी राजेंद्र सिंह का नाम है। उन्हें लखनऊ का टिकट लेना है। वे यहां दोपहर 3 बजे आ गए थे। इस कारण पहला नंबर आया। एक अन्य यात्री राजेश को दरभंगा के लिए टिकट लेना है। वे यहां लगातार तीसरे दिन टिकट लेने आए हैं। उनका कहना है कि दो बार तो उन्हें कंफर्म टिकट नहीं मिला। आज देखते हैं क्या रहता है।
रात 1:00 बजे : लाइन में खड़े रहने के कारण थके हुए यात्री दीवार के सहारे बैठे हैं। कुछ पास में लगी कुर्सियों पर तो कुछ फर्श पर ही सो रहे हैं। अग्रवाल फार्म से टिकट लेने आए सुखदेव ने बताया कि यहां पंखे तो लगे हैं, लेकिन रेलवे प्रशासन इन्हें रात में बंद कर देता है। यहां पीने के पानी का इंतजाम भी नहीं है। 
पिताजी को लाइन में लगाना पड़ा  : दुर्गापुरा स्टेशन पर लाइन में लगे राजेंद्र सिंह को जब भूख लगी तो उन्हें घर से पिता गिरधर सिंह को बुलाना पड़ा। सिंह ने बताया कि बेटा खाना खाकर लौटेगा तो वे घर चले जाएंगे।  
गांधीनगर स्टेशन 
रात 12:05 बजे : आरक्षण कार्यालय के बाहर एक स्थान पर तत्काल टिकट के लिए आने वाले अपना नंबर लगाते रहते हैं। यहां खिड़की पर टिकट के लिए भरी हुई पर्चियां रखी हैं। एक तरफ पुरुष और दूसरी तरफ महिलाओं की पर्चियां है। पुरुषों की पर्ची में पहले नंबर पर ग्लास फैक्ट्री से आए जयप्रकाश का नाम है। वे यहां पौने दो बजे से बैठे हैं। उनको देवरिया (यूपी) का टिकट लेना है। दूसरे नंबर पर सैम थॉमस का नाम है। हिम्मत नगर के रहने वाले थॉमस को केरल के लिए टिकट चाहिए।
रात 2:15 बजे : कुछ लोग खिड़की के पास खड़े हैं तो कुछ फर्श पर सो रहे हैं। यहां खड़े राजेश का कहना है कि रात को कुछ लोग पर्चियां फाड़ जाते हैं। इस कारण इसकी हिफाजत भी करनी पड़ती है।
रविवार सुबह : 10:10 बजे :  पहले नंबर पर लगे जयप्रकाश टिकट लेकर निकल चुके थे। उन्हें कंफर्म टिकट मिल गया था। दूसरे नंबर पर लगे सैम थॉमस की रात स्टेशन पर ही गुजरी, लेकिन सुबह 9 बजे अपने मौसाजी को लाइन में लगाकर वे भी घर चले गए।
घर से साथ ले आए कुर्सी : गांधीनगर स्टेशन पर तत्काल टिकट के लिए दोपहर में आए सैम थॉमस को पता था कि वहां बैठने का इंतजाम नहीं है, लिहाजा वे साथ में कुर्सी ले आए और वे अपना नंबर लगाकर यहां बैठ गए, लेकिन आरपीएफ के जवानों ने मना कर दिया। कहा कि आप यहां न तो कुर्सी लगा सकते हैं और न ही सो सकते हैं, केवल टहल सकते हैं।
ऑनलाइन क्यों नहीं 
रेल मंत्रालय और आईआरसीटीसी लगातार ऑनलाइन टिकटिंग को प्रमोट कर रहा है। फिर भी कतार क्यों? खुद यात्रियों की मानें तो 10 बजते ही आईआरसीटीसी का सर्वर बंद हो जाता है। जब तक वे लॉगिन करते हैं, अधिकतर ट्रेनों में वेटिंग आ जाती है।
आईआरसीटीसी के अफसर मानते हैं, सर्वर स्लो, जल्द बढ़ेगी स्पीड
'आईआरसीटीसी ने सर्वर को पहले से काफी अपग्रेड किया है। पहले ड्यूल कौर सर्वर था, जिसे हैक्साकौर कर दिया गया। इससे सर्वर की स्पीड बढ़ी है। पहले 8 जीबी रैम थी जो अब 64 जीबी हो गई है। इसके लिए 10 करोड़ रुपए खर्च किए गए। फिर भी हम मानते हैं कि इसकी स्पीड और बढ़ाने की जरूरत है। यह भी किया जा रहा है। अब अल्ट्रा मॉडर्न हार्डवेयर लगाया जाएगा। इससे इसकी स्पीड बहुत अधिक हो जाएगी। यह काम इस साल के अंत तक या फिर अगले साल के शुरू में हो जाएगा।'
-प्रदीप कुंदु, पीआरओ, आईआरसीटीसी
ऐसी कतारों को रोकने के लिए और क्या कर सकते हैं
1. तत्काल टिकट सिर्फ यात्रा करने वाले व्यक्ति या उसके परिजनों को ही दिया जाना चाहिए। इसके लिए यात्री के आईडी के साथ टिकट लेने आने वाले व्यक्ति का भी आईडी चेक किया जाना चाहिए। कारण, 90 फीसदी केसों में ट्रेवल एजेंट टिकट का ठेका लेते हैं और वे किसी को सौ-दो सौ रु. देकर 24 घंटे टिकट काउंटर पर खड़े कर देते हैं। 
2. जिन ट्रेनों में तुरंत टिकट बुक हो जाते हैं, उनके कारणों की जांच की जानी चाहिए। आईआरसीटीसी को इस मामले में आईटी एक्सपर्ट से मदद लेनी चाहिए। पहले सभी ट्रेनों में ऐसी ही स्थिति थी। कुछ महीने पहले आईआरसीटीसी की कार्रवाई में ऐसे कुछ साफ्टवेयर पकड़ने के बाद इसमें कमी आई। 
3. यात्रीभार के हिसाब से ट्रेनें बढ़ाने की जरूरत। जैसे, जयपुर से जम्मू (वैष्णो देवी) जाने के लिए एक ही ट्रेन हैं। इसमें स्कूलों में छुट्टियों तक स्लीपर में 400, थर्ड एसी में 300 और सेकंड एसी में 200 के करीब वेटिंग हैं। ऐसे में इस ट्रेन में बोगी बढ़ाने के साथ ही स्पेशल ट्रेन की भी जरूरत है।
Source - Bhasker 

Duo booked for vandalising ticket vending machine



RAILWAY Protection Force (RPF) has booked two commuters for vandalising an Automatic Ticket Vending Machine (ATVM) at Kanjurmarg station Friday. The duo was fined Rs 200 each by the railway court.

"The two were caught for vandalising an ATVM at Kanjurmarg. The incident was captured on CCTV camera," said Mukesh Nigam, divisional railway manager, Central Railway (CR).

Duo was booked by the RPF under Section 145 (nuisance), 146 (obstructing railway servants from duty) and 147 (trespass) of the Indian Railways Act.

Sources said the two damaged the machine as it was not functioning.

OVER the past two years, Central and Western Railway have spent nearly Rs 12 lakh to replace touch screens of 44 automatic ticket vending machines (ATVMs) that were vandalised. The cost of replacing a touch screen is around Rs 28,000, sources said.

In the last year, 26 such cases were reported at CR and 8 at Western Railway.

While anti-social elements are often blamed for such incidents, railway officers said that repeated failures of machines at times force commuters to vent their frustration.

Kanjurmarg is one station where ATVMs have been repeatedly vandalised.

Earlier this month, a similar case was reported at Ghatkopar station. But since the CCTV camera on a foot-over bridge was not covering the area around the ATVM, the offender could not be caught.

Source - INDIAN EXPRESS

 

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