Jun 7, 2014

NEW RATE OF NIGHT DUTY ALLOWANCE Effective From 01.01.2014



GOVERNMENT OF INDIA
MINISTRY OF RAILWAYS

RBE No. 55/2014

New Delhi, dated 23-05-2014.
No.E(P&A)II-2014/HW-1

The General Managers/CAOs,
All Indian Railways & Prod. Units etc,
(As per mailing lists No.1 & II).

Subject: Rates of Night Duty Allowance w.e.f. 01.01.2014.

Consequent to sanction of an additional instalment of Dearness Allowance vide this Ministry’s letter No. PC-VI/2008/I/7/2/1 dated 28.03.2014, the President is pleased to decide that the rates of Night Duty Allowance, as notified Vide Annexures ‘A’ and ‘B’ of Board’s letter No. E(P&A)II-2013/HW-2 dated 29.10.2013 stand revised with effect from 01.01.2014 as indicated at Annexure ‘A’ in respect of ‘Continuous’, ‘Intensive’, ‘Excluded’ categories and workshop employees, and as indicated at Annexure ‘B’ in respect of ‘Essentially Intermittent’ categories.

2. This issues with the concurrence of the Finance Directorate of the Ministry of Railways.

DA:One.
sd/-
(K.Shankar)
Director/E(P&A)
Railway Board



Mumbai Metro inauguration Sunday




Mumbai: Mumbai will enter a world class era of commuting with the inauguration of the Mumbai Metro Sunday, a top official said here Saturday. 

RInfra's Mumbai Metro One Pvt. Ltd CEO Abhay Mishra made the announcement at a media conference here Saturday morning. 

Accordingly, from Sunday the 11.4 km long Versova-Andheri-Ghatkopar east-west corridor with 12 stations en route on the elevated line will become operational, proving to be a boon for Mumbaikars, especially with the monsoon around the corner.

source - zee news

90 नए मेट्रो स्टेशन बन जाएंगे हरित भवन



नई दिल्ली। मेट्रो के तीसरे चरण में 90 नए मेट्रो स्टेशन हरित भवन के रूप में निर्मित किए जाएंगे। इसके साथ ही डीएमआरसी ने राजधानी की हरियाली को बढ़ाने के लिए शास्त्री पार्क के पास 15 हेक्टेयर भूमि वन विभाग को पौधारोपण के लिए दी है।
इसके अलावा शहर के विभिन्न भागों में पौधारोपण अभियान के लिए एसजीआई नामक गैर सरकारी संगठन के साथ एक करार भी किया है। डीएमआरसी की योजना आने वाले साल में 25 हजार से अधिक पौधे रोपने की है। मेट्रो का दावा है कि वह अब तक विभिन्ना हिस्सों में तीन लाख से अधिक पौधों और छह हजार से अधिक पेड़ों का प्रत्यारोपण कर चुकी हैं।
पेड़ काटने, लगाने और प्रत्यारोपण का विवरण
प्रथम चरण में मेट्रो को 14505 पेड़ गिराने की अनुमति मिली थी, जिनमें से सभी पेड़ न गिराकर 13858 पेड़ गिराए गए। इस प्रकार 647 पेड़ बचा लिए गए। काटे गए पेड़ों के बदले 39600 पेड़ लगाए गए। जबकि 3584 पेड़ों को प्रतिरोपित किया गया।
द्वितीय चरण में मेट्रो को 24453 पेड़ गिराने की अनुमति मिली थी, जिनमें से सभी पेड़ न गिराकर 17997 पेड़ गिराए गए। इस प्रकार 6456 पेड़ बचा लिए गए। बदले में 304651 पेड़ लगाए गए। जबकि 3052 पेड़ों को प्रतिरोपित किया गया।
निर्माणाधीन तीसरे चरण के लिए 16,001 पेड़ों को काटने की अनुमति ली गई है। डीएमआरसी का दावा है कि इनमें से 15 से 20 फीसद पेड़ों को बचाने का प्रयास किया जाएगा।
कार्बन डाईऑक्साइड उत्सर्जन में कमी
मेट्रो ने पर्यावरण के लिए हानिकारक कार्बन डाईऑक्साइड उत्सर्जन की कमी में उल्लेखनीय योगदान दिया है। डीएमआरसी के अनुसार पिछले 12 वर्षों में मेट्रो से 369 करोड़ से अधिक यात्रियों ने सफर किया है, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 2.9 मिलियन टन कार्बन डाईऑक्साइड की बचत की गई है।
Source - naidunia

ईरान में रेल हादसे में दो की मौत





तेहरान। उत्तरी ईरान में एक रेल हादसे में दो लोगों की मौत हो गई और 30 अन्य लोग घायल हो गए। यह जानकारी शुक्रवार को एक मीडिया रिपोर्ट में दी गई। मृतकों में ट्रेन का ड्राइवर शामिल है जबकि अन्य मृतक की फिलहाल शिनाख्त नहीं हुई है। आईआरएनए न्यूज एजेंसी के मुताबिक, उत्तरी ईरान के तेहरान से मशद जा रही एक यात्री ट्रेन गुरूवार देर रात डमघन शहर के करीब एक माल गाडी में जा भिडी।







SOURCE - khaskhabar

सरकार बदलते ही रेल भवन से गायब हो गई 13 'गोपनीय' फाइलें

सरकार बदलते ही रेल भवन से गायब हो गई 13 'गोपनीय' फाइलें

नयी दिल्ली। देश में सत्ता परिवर्तन हो गया हैं। यूपीए सरकार से सत्ता छीनकर जनता ने भारतीय जनता पार्टी को दे की बागडोर थमा दी हैं। सत्ता बदलते ही सरकारी महकमों में खलबली मच गई हैं। 'जरूरी' फाइलें गायब होने लगी हैं। ताजा मामला रेल भवन का है जहां नए रेल मंत्री के कार्यभार संभालने से पहले 13 गोपनीय फाइलें गायब हो चुकी हैं। अंग्रेजी अखबार 'द इंडियन एक्सप्रेस' के मुताबिक रेल भवन से 13 जरूरी फाइलें गायब हो गई हैं। गायब हुई फाइलों की खोज लगातार जारी है। अब तक इन फाइलों की अनौपचारिक खोजबीन चल रही थी, लेकिन 23 मई को रेलवे बोर्ड ने इन फाइलों को 'गायब' बताते हुए अपनी सभी शाखाओं में इसकी खोज करने का आदेश दे दिया हैं। रेलवे बोर्ड ने इसके लिए 16 जून तक का समय दिया है। इस तय समय सीमा तक ये फाइलें नहीं मिलतीं तो बोर्ड इन फाइलों के 'गायब' होने की आधिकारिक घोषणा कर देगा। अखबार के मुताबिक, ये फाइलें अपने संबंधित विभागों और दफ्तरों से गायब हुई हैं। गायब हुई पाइलें काफी महत्वपूर्ण हैं। इन फाइलों में कई महत्वपूर्ण दस्तावेज हैं जिनमें कई अंदरूनी जानकारियां दर्ज हैं। हालांकि रेलवे बोर्ड का मानना है कि अगर विभाग के कंप्यूटर में सेव किए गए हों तो इन फाइलों में जो दस्तावेज थे उन्हें फिर से इकट्ठा किया जा सकता है।

Source - One India

अब रेल परियोजनाओं को भी अच्छे दिनों का इंतजार




मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने तीन दिन में अपने मंत्रियों और अफसरों से उन योजनाओं की जानकारी मांगी है जो केंद्र स्तर पर अटकी हैं या जिन्हें मंजूरी के लिए केंद्र सरकार को भेजा जाना है। अन्य योजनाएं तो केंद्र तक चली जाएंगी लेकिन प्रदेश की रेल परियोजनाओं का क्या होगा, यह सवाल हर किसी के मन में है। प्रदेश के अन्य रेल प्रोजेक्ट्स के अलावा मालवा-निमाड़ की बरसों पुरानी रेल परियोजनाएं अब अच्छे दिन की बांट जोह रही हैं। ऐसे में केन्द्र में सरकार बदलने और इंदौर से सांसद सुमित्रा महाजन के संसद में ताकतवर बनकर उभरने से इस बार उम्मीद पुरजोर है कि इन प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी मिल सकेगी।

क्षेत्र के लोगों को यह उम्मीद अब इसलिए ज्यादा है क्योंकि पूरे मालवा-निमाड़ से अब भाजपा के ही सांसद लोकसभा में प्रतिनिधित्व करेंगे। केंद्र में भी भाजपा सरकार है और प्रदेश में भी। एनडीए सरकार जल्द ही नए सिरे से रेल बजट बनाने की तैयारी में जुट जाएगी। यदि प्रदेश के केंद्रीय मंत्री, क्षेत्रीय सांसद और प्रदेश सरकार अभी से केंद्रस्तर पर दबाव बनाना शुरू कर दें तो इसका असर परियोजनाओं की मंजूरी और उनके बजट आवंटन पर पड़ सकता है।

अंचल की चार महत्वाकांक्षी रेल योजनाएं

1. रतलाम-इंदौर-महू खंडवा-अकोला बड़ी लाइन

लंबाई- 472.64 किलोमीटर

लागत- 1421.25 करोड़ रुपए

अब तक खर्च- 119.83 करोड़

फायदे- उत्तर और दक्षिण भारत को जोड़ने वाला सबसे छोटा रेल मार्ग। बड़ी लाइन बिछने से इंदौर को सबसे ज्यादा फायदा क्योंकि इससे यह शहर मुख्य लाइन का स्टेशन बन जाएगा। छोटी लाइन के कारण इंदौर की रेल कनेक्टिविटी दक्षिण भारत से सबसे कम है। बड़ी लाइन बिछने पर दक्षिण भारतीय राज्यों के साथ महाराष्ट्र आने-जाने वालों को भी संकरा रास्ता मिलेगा। फिलहाल इस प्रोजेक्ट में फतेहाबाद-इंदौर के बीच बड़ी लाइन बिछाने की तैयारी हो रही है।

2. इंदौर (महू)- मनमाड़ नई रेल लाइन

लंबाई- 329 किलोमीटर

लागत- लगभग 4000 करोड़

मंजूरी का इंतजार - रेलवे चाहता है कि परियोजना के लिए महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश अपने-अपने हिस्से के काम में 50-50 फीसद राशि का अंशदान दें। महाराष्ट्र सैद्धांतिक रूप से खर्च उठाने को तैयार है लेकिन मप्र सरकार नहीं। प्रोजेक्ट यहीं उलझा पड़ा है। चूंकि यह रेल परियोजना बजट में मंजूर नहीं है इसलिए इस पर कोई काम शुरू नहीं हुआ।

फायदे- दिल्ली-मुंबई को जोड़ने वाला सबसे छोटा रेल मार्ग। इंदौर से मुंबई की वर्तमान दूरी 823 किमी है जो करीब 250 किमी तक घट जाएगी। यह लाइन एबी रोड के समानांतर बिछना है। मालवा-निमाड़ और महाराष्ट्र के जिन शहरों से होकर यह गुजरेगी, उनमें से ज्यादातर न केवल पिछड़े हैं बल्कि रेल लाइन से अछूते भी हैं।

3. इंदौर-दाहोद नई लाइन

लंबाई- लगभग 206 किमी

लागत- 1642.17 करोड़ रुपए

अब तक खर्च- लगभग 260 करोड़ रुपए

फायदे- धार-झाबुआ जैसे आदिवासी पिछड़े इलाके में रेल पहुंचने से विकास होगा। गुजरात से राऊ और राऊ से खंडवा होते हुए सीधे दक्षिण भारत की कनेक्टिविटी मिलेगी। दिल्ली-मुंबई के लिए वैकल्पिक रेल मार्ग उपलब्ध होगा।

4. छोटा उदयपुर-धार नई लाइन

लंबाई- 157 किलोमीटर

लागत- 1350.50 करोड़ रुपए

अब तक खर्च- 248 करोड़ रुपए

फायदे- गुजरात और मध्यप्रदेश के आदिवासी पिछड़े जिलों में रेल पहुंचने से विकास की नई संभावनाएं बनेंगी। इंदौर से मुंबई तरफ आने-जाने वाली ट्रेन को नया छोटा रास्ता मिलेगा। यात्रियों के साथ मालभाड़ा परिवहन के लिए भी वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होगा। दाहोद लाइन जैसे फायदे की योजना।

पश्चिम रेलवे को इंदौर-खंडवा और दक्षिण मध्य रेलवे को खंडवा-आकोत के बीच सर्वोच्च प्राथमिकता से बड़ी लाइन बिछाना चाहिए। इस लाइन से जम्मूतवी से रामेश्वर की दूरी 700 किमी तक कम होगी। ईंधन, समय, पैसा, सब बचेगा। कम दूरी के कारण रेल कोचों का टर्नअराउंड जल्दी होगा। इसके बाद आदिवासी बेल्ट को जोड़ने वाली इंदौर-दाहोद और छोटा उदयपुर-धार रेल लाइन को प्राथमिकता मिलना चाहिए। दोनों लाइन दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के फीडर रूट का काम करेंगी और इससे गुजरात की कनेक्टिविटी भी बेहतर होगी।

- विमल झांझरी, रेलवे विशेषज्ञ

सारे प्रोजेक्ट रेलवे के लिहाज से भी कमाई वाले हैं। महू-खंडवा के बीच लगभग 123 किमी लंबे मार्ग पर दो बड़ी बाधाएं हैं। पहली बड़वाह-सनावद के बीच पुल बनाने की और दूसरा डायवर्शन वाले 15 किमी रूट के लिए पर्यावरण मंत्रालय से क्लियरेंस लेने की। दोनों काम अभी से शुरू होना चाहिए। यदि रेलवे मंत्रालय के पास फिलहाल फंड नहीं है तो वह खंडवा में बन रहे थर्मल पावर प्लांट से भी अग्रिम राशि मांग सकता है। भविष्य में यह राशि प्लांट के लिए कोयला परिवहन के भाड़े में समायोजित होती रहेगी।

-नागेश नामजोशी, रेलवे मामलों के वरिष्ठ जानकार

इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन को लेकर रेल मंत्रालय के अफसर यह साबित करने में तुले हैं कि यह प्रोजेक्ट घाटे का सौदा है, जबकि यह फायदे का प्रोजेक्ट है।

-मनोज मराठे, (20 साल से इंदौर-मनमाड़ लाइन के लिए संघर्ष करने वाले और इसे लेकर हाईकोर्ट में याचिका लगाने वाले व्यक्ति)

मैंने चुनाव में जो-जो वादे किए थे, वे सभी मेरी प्राथमिकताएं में हैं। मालवा की रेल परियोजनाओं के बारे में मैं पहले भी लगातार चिंता करती रही हूं। संसद में काम चालू हो जाए, उसके बार हर बिंदू पर काम होगा।

Source - nai dunia

Mumbai Metro gets rail board go ahead




The Railway Board has finally given approval to the rolling stock of Maharashtra's first metro rail – Mumbai Metro (Versova-Andheri-Ghatkopar corridor). Now, a decision on the fare hike is awaited.
According to sources, with the Railway Board approval has been given for the mechanical systems of the metro rail.

Another source involved in the construction of the metro rail shared that the Railway Board on Tuesday made notings on the file of Mumbai Metro and the sanction letter for the rolling stock of the metro rail is likely to be received by the state authorities by Friday.

Earlier in May, the Commissioner of Metro Railway Safety had issued a provisional safety certificate to the 11.04 km long metro route. Thereafter, permission from the Railway Board was eagerly awaited.

Construction on the project had begun in 2008 with a deadline set for March 2012. Reliance Infrastructure-led Mumbai Metro One Private Limited (MMOPL) had announced that their revised deadline was March 2014, but that too was missed.

There is a possibility that the corridor will be inaugurated by a state dignitary within a fortnight. However, just before the commissioning of the project a final call will be taken on whether to increase the metro rail fares as demanded by RInfra or to retain the fare hike approved in September last year.

In September 2013, the chief minister had increased the ticket rates as per the clauses of the concession agreement signed between RInfra and state authorities.

The initial fares were (up to 3km) Rs 8 (3-8 km) and Rs 10 (over 10 kms). The CM had increased it to Rs9 (up to 3 km), Rs 11 (3-8 km) and Rs 13 (over 8 km), as against Rinfra's demand of Rs22 (up to 3 km), Rs28 (3-8 km) and Rs 33 (over 8 km).

Once the route is opened for public, it is expected to ease commuting woes for Mumbai and is also likely to reduce ridership of the suburban locals of Mumbai due to its East-West connectivity.

FLOW CHART FOR METRO CERTIFICATION PROCEDURE

Submission of DPR (Detailed Project Report) to MoR (Ministry of Railways)
Approval of DPR by MoR
MoR sends comments on DPR to MoUD (Ministry of Urban Development)
Submission of SOD (Schedule of Dimensions) and DBR (Design Basis Report) to RDSO (Research, Design and Safety Organisation) through MoR
Scrutiny of SOD and DBR in RDSO and communication to MoR
Approval of SOD and DBR through MoR
Submission of documents to RDSO/MoR as per annexures A to E2
MoR sends comments on SOD and DBR to Metro Operators
RDSO sends comments and suggestions on docs. to Metro
Issue of speed certificate by RDSO for conducting speed Trial
Communication of Approval to MoUD
Scrutiny and examination of test certificates as per clause 6 of the manual
Metro applies to CRS (Commissioner for Railway Safety) /CMRS (Commissioner for Metro Railway Safety) for sanction for conducting oscillation trial
Sanction of CRS /CMRS for conducting oscillation trial
RDSO conducts oscillation & EBD (Emergency Braking Distance) trials
RDSO conducts coupler force, controllability and/or any other special test, if required
Metro applies for authorisation of CRS / CMRS
CRS /CMRS conducts inspection
CRS/CMRS Authorises the Metro for opening of Corridor
Metro apply for sanction of MoR based on CRS/CMRS authorisation
Sanction of MoR to Metro for commercial running of metro at the specified speed.
Opening of corridor by Metro.

There will be food and beverage shops, convenience stories, mobile and accessories stores as well as ATM machines at the 12 metro stations.
Source - DNA

By dusting open reports, Gowda can tackle the issue of Railway ‘safety’ with ‘speed’

The new railway minister D V Sadananda Gowda has identified safety as the top most priority. He is neither the first nor would be the last railway minister to pick safety as the key agenda. 

Gowda though has a chance to quickly make a difference should he choose not to reinvent the wheel but instead do what his predecessors did not do. That is to dust off plethora of expert recommendations on safety already available with the government. 

Be it the report by Anil Kakodkar Committee in 2012 or by Rakesh Mohan Committee in 2001, the new minister can give respite to more than 8,900 million passengers who travel annually in the country by simply executing the valid recommendations. 

In his election campaigns, Narendra Modi had expressed concern over the neglect of India’s railways and promised an overhaul of the network. 

On the day of Modi’s swearing in ceremony, a passenger train in Uttar Pradesh rammed into a stationary freight train at a station in the morning, killing 26 and injuring 44. 

To help Gowda navigate the two detailed reports, Zee Research Group (ZRG) has identified the short and medium term agenda for action on safety. 

On March 12, 2012, a High Level Safety Review Committee headed by Dr Anil Kakodkar, famous Indian nuclear scientist had recommended setting up of a statutory Railway Safety Authority (RSA) and a safety architecture that is powerful enough to have a safety oversight on the operational mode of Indian Railways without detaching safety with the railway operations. 

E Sreedharan, former MD of Delhi Metro Rail Corporation (DMRC) acted as an advisor to the panel. Sreedharan is the man the government is widely believed to be keen to rope in as an advisor. He might well be tasked to put to life his own recommendation. 

A little over two years after the publication of the Indian Railways’ Vision 2020 document which aimed at catapulting the Indian Railways (IR) into the forefront of world railways, the Kakodkar Committee on railway safety published its report, with plans that require an outlay of Rs. 1 lakh crore. 

Indian Railways’ Vision 2020 & White Paper presented unprecedented thrust on safety issues. The document envisaged an annual outlay of Rs.1.4 lakh crore over a decade with an estimated annual gross budgetary support (GBS) of Rs.50, 000 crore by the Central government. 

Immediately after the Kakodkar Committee report, the Sam Pitroda Committee had submitted its plans for the modernization of Indian Railways at a cost of Rs.5.6 lakh crore. Sam Pitroda had talked about including a safety cess on passengers. 

The Kakodkar Committee's recommendation had suggested an organizational change in the Railway Board for creating a more responsive and effective “ecosystem” for safety on the Railways. 

The Indian Railways Report (2001), better known as the Rakesh Mohan Committee Report, had talked about these changes, but there was no implementation. 

However, contrary to the fate of most committee reports, the recommendations of the Justice H R Khanna Committee, set up in 1997 were taken seriously and followed up to a large extent. The Special Railway Safety Fund (SRSF) of Rs.17, 000 crore set up in 2001 and the Corporate Safety Plan 2003-2013 (CSP) unveiled in August 2003 arose out of the recommendations of the Khanna Committee. 

Senior retired Railway officials argue that with each change of government at the Centre or the Minister, there is a tendency to view with suspicion, if not outright contempt and ridicule, the policies of the previous regime and to reverse them. 

As reported by ZRG earlier, serious concern over safety issues in Indian Railways can be clearly due to non acceptance of recommendations prescribed by various committees and dual command approach for Commission of Railway Safety (CRS). 

According to a report by the railways published in 2012, nearly 14,376 people had died on the tracks in 2009, followed by 12,894 deaths in 2010 and 14,611 in the following year. And the railway board predicted that in the last three years about 50,000 people must have lost their lives. 

Talking about rail safety, metro man Sreedharan said in a signed piece in 2012, “Today, I am not confident of sending my family on a train given the number of accidents. So, improving safety of the railways is a very urgent necessity.”
Source - Zee News

स्टेशन पर पानी के लिए हाहाकार

- जंक्शन पर नहीं है रेल नीर, यात्रियों के बीच हाहाकार

- पिछले तीन दिन से नहीं आया रेल नीर
GORAKHPUR : इस भीषण गर्मी में एनईआर अपने पैसेंजर्स को पानी के लिए तरसा रहा है. गोरखपुर जंक्शन पर बिकने वाले रेल नीर की तीन दिनों से सप्लाई ठप है.दूसरी तरफ रेलवे स्टेशन पर लगे टैप उबला पानी पिला रहा है. रेल नीर के शॉर्टेज के चलते यात्रियों के लिए मुश्किलें बढ गई हैं.

ब्भ्00-भ्000 लीटर है पानी की खपत

कैटरिंग डिपार्टमेंट की मानें तो स्टेशन पर ब्भ्00-भ्000 लीटर रेल नीर की खपत है, लेकिन दानापुर से ही रेल नीर नहीं आ रहा है. वहीं कैटरिंग डिपार्टमेंट के एक अधिकारी ने बताया कि रेल नीर इस वजह से नहीं आ पाया है क्योंकि हाजीपुर के पास स्थित एक पुल टूट गया है. जिसके चलते ट्रक घूमकर आ रही है. इसलिए टाइम ज्यादा लग रहा है.

केवल कुछ स्टालों पर है पानी की बोतलें

प्लेटफार्म नंबर एक से लेकर नौ तक खानपान के ख्7 स्टाल है. इसमें एनई रेलवे के क्क् और क्म् स्टाल ठेकेदार के हैं. रेलवे के स्टालों को छोड़ ठेकेदार के स्टालों पर रेलनीर की बोतलें नदारद हैं. हालांकि कैटरिंग डिपार्टमेंट रेलनीर के आल अधिकारियों को अवगत करा दिया है, लेकिन समस्या जस की तस है.
Source-inext live

China pledged railway network: PM

KATHMANDU, JUN 07 - Prime Minister Sushil Koirala has said that enhanced connectivity between China and South Asia holds the key to the overall development of the region. The issue of connectivity dominated the second China-South Asia Exposition which kicked off in Kunming, the capital of China’s Yunan Province, on Friday.

On his return from a whirl-wind trip to expo as the ‘Guest of Honour’, PM Koirala said all the regional leaders who attended the event were unanimous on one thing: improved rail, road and air connectivity with China and among other countries in the region will pave the way for several other splendid opportunities for cooperation. Nepal is the ‘Country of Honour’ at the expo this year.

“During the event’s opening ceremony and also throughout my meetings with Chinese and other regional leaders, one thing was stressed again and again that our future lies in improved connectivity within the region and beyond,” Koirala told reporters at the Tribhuvan International Airport. “After establishing peace and stability, we all should focus on enhancing the regional connectivity.”

The central theme of this year’s expo is expanding trade and commerce in the region; boosting investment-centred cooperation; accelerating inter-connectivity and jointly establishing an economic corridor between China and South Asia first and foremost.

Highlighting China’s emergence as an engine of the global economy, Koirala expressed hope that Nepal would greatly benefit from an unprecedented economic transformation taking place in the neighbourhood.

Outlining Nepal’s development vision to become a modern, progressive and just society, and the government’s plan to graduate from LDC to developing country status by 2022, Koirala stressed the need for massive investment in human resources and infrastructure.

China, which has been assisting Nepal to develop north-south economic corridors, is also keen to extend its rail network to the Nepal border. The two countries have also agreed to increase the frequency of flights to 56 a week from the current 14.

PM Koirala also thanked China for offering support to Nepal in hosting the 18th Saarc Summit scheduled for November.

PM Koirala further said that he met Chinese Vice-Premier Wang Yang, Secretary of the Communist Party of China Qin Guangrong on the sidelines of the event and also interacted with other regional leaders.
Source-ekantipur

KINGS COUNTY FILES ANOTHER SUIT AGAINST HIGH-SPEED RAIL

FRESNO, Calif. (KFSN) --

The Kings County Farm Bureau is among those bringing the suit, claiming the High-Speed Rail Authority's environmental impact report didn't accurately state how much fill dirt it would need to bring in, and Farm Bureau Director Diane Friend says that dirt will create too much dust.

"And by skewing that number of how much fill dirt it also skews the number of particulates that will affect the air quality of our Valley," she said.

While the High-Speed Rail Authority has not yet seen the lawsuit, Diana Gomez of the High-Speed Rail Authority's Fresno office says the environmental work is thorough. 

"We feel that we have developed an environmental document that covers everything an environmental document should cover; it's over 17,000 pages," she said.

Fresno County Supervisor Henry Perea is a high-speed rail supporter and says he supports Kings County's right to sue, but questions their motives. 

"That's what happens, you always have those folks who are afraid of change, don't want to see this country progress," he said.

Friend says it's just about making sure high-speed rail follows the rules.

"That's where the issues lie, in the facts, not in the innuendo that we are just a bunch of wackos out here that hate high-speed rail; that isn't the truth," she said.
Source-abc30

Passengers should be made to feel they are welcome: Railway Board chairman

KOLKATA: Passengers should be made to feel that they are welcome, Railway Board chairman Arunendra Kumar told senior officials of Eastern, South Eastern and Metro Railways in Kolkata on Friday. The Indian Railways has demanded additional funds from the Government of India and there will be adequate allocation for the ongoing Metro Railway projects in Kolkata, he told journalists after a marathon session with senior officers of the three railway zones headquartered in Kolkata. In the 2012-13 Railway Budget, allocations for the Metro projects were paltry. 

 

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