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रेलवे ने बदली कई ट्रेनों की टाइमिंग, यात्रा से पहले नोट कर लें डिटेल

उत्तर रेलवे मुख्यालय ने नजीबाबाद से गुजरने वाली कई ट्रेनों के समय में बदलाव किया है। यह परिवर्तन 1 जनवरी 2026 से प्रभावी होगा। रेलवे बोर्ड द्वारा एक साल बाद किए गए इस बदलाव से टनकपुर-देहरादून एक्सप्रेस, लखनऊ-चंडीगढ़ सुपरफास्ट सहित कई ट्रेनों के आगमन समय में मामूली परिवर्तन हुआ है। यात्रियों को यात्रा से पहले नई समय-सारणी की जांच करने की सलाह दी गई है। ठहराव के समय में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

जी हां उत्तर रेलवे मुख्यालय बड़ौदा हाउस ने नजीबाबाद से होकर गुजरने वाली कुछ ट्रेनों के समय में परिवर्तन किया है। रेलवे बोर्ड ने यह बदलाव एक साल बाद किया है। नजीबाबाद रेलवे स्टेशन पर इन ट्रेनों का ठहराव दो से पांच मिनट है यानी स्टॉपेज के समय में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है।

उत्तर रेलवे मुरादाबाद मंडल मुरादाबाद के वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक आदित्य गुप्ता के अनुसार एक जनवरी 2026 से ट्रेनों के समय में परिवर्तन किया गया है। ट्रेन संख्या-15020 टनकपुर-देहरादून एक्सप्रेस ट्रेन के नजीबाबाद पहुंचने का समय पहले सुबह 03:05 बजे था, लेकिन अब 03:09 बजे हो गया है।

ट्रेन संख्या-12231 लखनऊ-चंडीगढ़ सुपरफास्ट सुबह 05:34 बजे आती थी, अब यह 05:32 बजे आती है। ट्रेन संख्या-14649 जयनगर से अमृतसर को जाने वाली सरयू यमुना एक्सप्रेस और ट्रेन संख्या-14673 पहले 07:44 बजे आती थी, अब ये दोनों ही ट्रेनें 07:45 बजे आती हैं।

ट्रेन संख्या-14113 सूबेदारगंज-देहरादून लिंक एक्सप्रेस पहले 09:05 बजे आती थी, अब इसका समय 08:42 बजे हो गया है। ट्रेन संख्या-12317 काेलकाता-अमृतसर सुपरफास्ट पहले 09:14 बजे, अब यह 09:12 बजे, ट्रेन संख्या-12092 काठगोदाम-देहरादून नैनी शाताब्दी पहले 09:46 बजे, अब यह 09:41 बजे, ट्रेन संख्या-54443 चंदौसी-ऋषिकेश पैसेंजर पहले सुबह 10:30 बजे, अब यह 10:25 बजे आती है।

ट्रेन संख्या-14229 प्रयागराज-न्यूऋषिकेश एक्सप्रेस ट्रेन पहले 11:49 बजे, अब यह 11:56 बजे आती है। ट्रेन संख्या-15211 दरभंगा-अमृतसर एक्सप्रेस पहले शाम 04:55 बजे आती थी, अब यह 04:30 बजे आती है।

ट्रेन संख्या-14603 सहरसा-अमृतसर एक्सप्रेस ट्रेन पहले शाम 05:10 बजे, अब 04:55 बजे, ट्रेन संख्या-13005 हावड़ा-अमृतसर पंजाब मेल पहले रात 11:32 बजे आती थी, 11:28 बजे आती है।

भारतीय रेल में बड़ा बदलाव: अब आधार वेरिफिकेशन के बिना सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक IRCTC पर टिकट बुक नहीं हो पाएगा

भारतीय रेल ने आरक्षण प्रणाली में एक महत्वपूर्ण बदलाव लागू कर दिया है जो खासकर IRCTC (Indian Railway Catering and Tourism Corporation) के ऑनलाइन टिकट बुकिंग सिस्टम को प्रभावित करेगा। नए नियम के तहत जिन यात्रियों के खाते में आधार वेरिफिकेशन नहीं है, वे सुबह 8:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक ट्रेन टिकट ऑनलाइन बुक नहीं कर पाएंगे — एक महत्वपूर्ण बदलाव जो 5 जनवरी 2026 से प्रभावी हो गया है।

📌 नया नियम क्या कहता है?

अब अगर आपका IRCTC अकाउंट आधार से लिंक और वेरिफाई (जाँचा) नहीं है, तो:

  • आप आरक्षण खुलने के सबसे भीड़-भाड़ वाले समय (8:00 से 16:00) के दौरान टिकट नहीं बुक कर सकेंगे।

  • यह नियम केवल ऑनलाइन बुकिंग (IRCTC वेबसाइट या मोबाइल ऐप) पर लागू होता है — टिकट काउंटर (PRS) से बुकिंग पर फिलहाल कोई रोक नहीं है।

📆 कब और कैसे लागू हुआ?

रेलवे ने यह बदलाव तीन चरणों में लागू किया है:

  1. 29 दिसंबर 2025: पहले चरण में गैर-आधार वेरिफाइड उपयोगकर्ताओं को सुबह 8 बजे से दोपहर 12 बजे तक बुकिंग से रोका गया।

  2. 5 जनवरी 2026: अब यह समय बढ़ाकर 8:00 से 16:00 तक कर दिया गया है — यानी पूरे दिन का मुख्य बुकिंग समय सिर्फ आधार-वेरिफिकेशन वाले यात्रियों के लिए है।

  3. 12 जनवरी 2026: अंतिम चरण में यह नियम और भी कड़ा होकर 8:00 से मध्यरात्रि (00:00) तक लागू होने वाला है — यानी दिन भर ऑनलाइन टिकट सिर्फ आधार-जाँचे खातों से ही बुक होंगे।

🛠 इसका उद्देश्य क्या है?

रेल मंत्रालय के अनुसार इस नए नियम का मुख्य उद्देश्य है:

✔️ टिकट बुकिंग सिस्टम में पारदर्शिता बढ़ाना
✔ बॉट, दलालों और फर्जी खातों के द्वारा टिकटों की होड़ को रोकना
✔ आम यात्रियों को आरक्षण के उच्च-मांग वाले समय में प्राथमिकता देना

🧑‍💻 क्या करना होगा यात्रियों को?

यदि आप रेल टिकट ऑनलाइन बुक करना चाहते हैं, तो:

  • अपने IRCTC खाते में Aadhaar लिंक/वेरिफाई कर लें।

  • वेरिफिकेशन से जुड़े OTP को समय पर पूरा करें ताकि प्रमुख बुकिंग विंडो में टिकट बुक कर सकें।

अगर आपका खाता आधार से लिंक नहीं है, तो रात को 4 बजे के बाद या बाद के दिनों में आप बुकिंग कर सकते हैं — लेकिन आरक्षण खुलते ही टिकट तुरंत भर जाने की संभावना अधिक होती है, इसलिए आधार वेरिफिकेशन जल्दी कर लेना बेहतर है।

अगले छह महीनों में 8 नई वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें शुरू — रेल मंत्री का बड़ा ऐलान

भारतीय रेलवे अपने यात्रियों के लिए एक और बड़ा बदलाव लाने जा रही है। रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की है कि वंदे भारत का स्लीपर वर्जन जल्द ही देशभर में दौड़ना शुरू होगा।

🛤️ पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन जल्द परिचालन में

इस साल की शुरुआत में देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर दिखाई दी है और इसका संचालन गुवाहाटी से कोलकाता (हावड़ा/हावरा) के बीच शुरू करने की तैयारी चल रही है।

लॉन्च तारीख:
रेल मंत्री के अनुसार, यह सेवा अगले 15–20 दिनों के भीतर शुरू हो सकती है और इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे।

🚄 ट्रेन की खास बातें

  • ट्रेन 16 कोच वाली होगी और इसमें एसी स्लीपर सुविधाएँ होंगी।

  • यह ट्रेन लगभग 180 किमी/घंटा की अधिकतम गति पर दौड़ने में सक्षम होगी।

  • यात्री क्षमता करीब 823 बैठकों की होगी, जिनमें 3-AC, 2-AC और 1-AC श्रेणियाँ शामिल हैं।

  • सुविधा और सुरक्षा दोनों का विशेष ध्यान रखा गया है, जैसे कि स्वचालित ट्रेन संरक्षण प्रणाली (कवच), फायर सेफ्टी और एआई-आधारित कैमरे।

💺 किराया और सुविधाएँ

रेल मंत्री ने कहा कि टिकट फेयर को औसत टिकट यात्री की जेब के अनुसार डिज़ाइन किया गया है। अनुमान के मुताबिक:

  • 3-AC: लगभग ₹2300 (भोजन सहित)

  • 2-AC: लगभग ₹3000

  • 1-AC: लगभग ₹3600

ये किराया हवाई यात्रा की तुलना में काफी सस्ता है, जिससे यात्रियों को बेहतर विकल्प मिल सकेगा।

📅 आने वाले छह महीने में विस्तार

रेल मंत्रालय ने बताया है कि यह सिर्फ शुरुआत है। अगले 6 महीनों में 8 नई वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें शुरू की जाएंगी और वर्ष के अंत तक इनकी संख्या 12 तक पहुंच सकती है

यह कदम भारतीय रेलवे की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य है लंबी दूरी की रात्रीय यात्राओं को तेज़, आरामदायक और आधुनिक सुविधाओं से भरपूर बनाना

भारतीय रेलवे का AI-आधारित सिस्टम: वन्यजीवों को ट्रेन हादसों से बचाने का नया कदम

भारतीय रेलवे ने वन्यजीवों के संरक्षण के लिए एक उन्नत AI-आधारित तकनीक (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) का उपयोग शुरू किया है, जिसका लक्ष्य है रेलवे ट्रैक पर घूमने वाले जंगली जानवरों जैसे हाथी, शेर और बाघों को ट्रेन दुर्घटनाओं से बचाना

🐘 क्या है यह नई तकनीक?

रेलवे ने एक AI संचालित इंट्रूज़न डिटेक्शन सिस्टम (IDS) लागू किया है।
यह सिस्टम खासतौर पर उन इलाकों में काम करता है जहाँ:

  • जंगल की सीमाएँ रेलवे ट्रैक के पास हैं,

  • और जहाँ हाथी, बाघ, शेर जैसे भारी-भरकम जानवर अक्सर रेलवे पटरियों को पार करते हैं।

यह सिस्टम Distributed Acoustic Sensing (DAS) तकनीक का उपयोग करता है, जो रेलवे ट्रैक के पास होने वाली आवाज़ और कंपन को पहचान सकता है और ऑनलाइन चेतावनी भेज सकता है

📍 कैसे काम करता है?

जब भी कोई बड़ा जानवर ट्रैक के करीब आता है:

  1. DAS सेंसर उसकी आवाज़/कंपन को पकड़ते हैं।

  2. सिस्टम तुरंत अलर्ट तैयार करता है।

  3. यह अलर्ट लॉको पायलट (ट्रेन ड्राइवर), स्टेशन मास्टर और नियंत्रण कक्षों को भेजा जाता है।

  4. इससे ट्रेनों को समय रहते धीमा किया जा सकता है या रोक दिया जाता है जिससे टकराव से बचा जा सके

📈 कहाँ लागू किया जा रहा है?

इस तकनीक को शुरुआत में नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे (NFR) में लागू किया गया है, जहाँ इसे
141 किलोमीटर की दूरी पर सफलतापूर्वक चलाया गया। उसके बाद सफलता को देखते हुए इसे आगे बढ़ाकर कुल **1,122 किलोमीटर तक लागू करने के लिए अनुबंध जारी किए गए हैं।

🐾 क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल?

भारत में अक्सर रेल-जंगल सीमाओं पर रेलगाड़ियों के कारण:

  • हाथियों और अन्य बड़े जानवरों को चोट या मौत का जोखिम रहता है,

  • ट्रेन दुर्घटनाओं से यात्री और इंजन/कोचों को भी नुकसान हो सकता है।

इसलिए इस AI-सिस्टम से:

✔️ जानवरों को सुरक्षित मार्ग पार करने का समय मिलता है
✔️ रेल दुर्घटनाओं की आशंका कम होती है
✔️ वन्यजीव संरक्षण को तकनीकी सहायता मिलती है

📌 निष्कर्ष

भारतीय रेलवे की यह नई AI-आधारित निगरानी प्रणाली तकनीक और पारिस्थितिकी के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह दिखाता है कि कैसे उन्नत तकनीक का इस्तेमाल न केवल यातायात सुरक्षा के लिए हो सकता है, बल्कि प्रकृति और जंगली जीवन को संरक्षित करने के लिए भी किया जा सकता है।