कहां बना था दुनिया का पहला रेल इंजन? जानिए भारत में कैसे फैला इसका नेटवर्क

June 22, 2019, 10:25 AM
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पहली बार ट्रेन की परिकल्पना 1604 में इंग्लैण्ड के वोलाटॅन में हुई थी जब लकड़ी से बनायी गई पटरियों पर काठ के डब्बों की शक्ल में तैयार किये गए ट्रेन को घोड़ों ने खींचा था।

आज दुनिया की 90 फीसदी आबादी ट्रेन से सफर करती है। ट्रेन ने लोगों की जिंदगी में क्रांतिकारी परिवर्तन किया है। ऐसे में मन में सवाल उठना लाजिमी है कि इसकी परिकल्पना आखिर कैसे की गई। आज हम यही आपको बताने जा रहे हैं। पहली बार ट्रेन की परिकल्पना 1604 में इंग्लैण्ड के वोलाटॅन में हुई थी जब लकड़ी से बनायी गई पटरियों पर काठ के डब्बों की शक्ल में तैयार किये गए ट्रेन को घोड़ों ने खींचा था। इसके दो शताब्दी बाद फरवरी 1824 में पेशे से इंजीनियर रिचर्ड ट्रवेथिक को पहली बार भाप के इंजन को चलाने में सफलता मिली। ये पहला आधिकारिक रेलवे इंजन था।

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पूरी दुनिया में परिवहन के लिए किसी सस्ते और तेज गति के साधन की जरूरत कई वर्षों से महसूस की जा रही थी। इसी क्रम में सबसे पहले जॉर्ज स्टीफेंसन ने 1814 में भाप का इंजन बनाया, जो शक्तिशाली तो था ही, साथ ही अपने से भारी वस्तुओं को खींचने में भी सक्षम था। पर ये ट्रेन नहीं खींच सकता था। ट्रेन तो रिचर्ड के ही इंजन ने खींचा।

27 सितंबर 1825 को भाप इंजन की सहायता से 38 रेल डिब्बों को खींचा गया जिनमें 600 यात्री सवार थे। इस पहली रेलगाड़ी ने लंदन के डार्लिंगटन से स्टॉकटोन तक का 37 मील का सफर 14 मील प्रति घंटे की रफ्तार से तय किया। इस घटना के बाद अनेक देश रेल के इंजन और डिब्बे बनाने में जुट गए।

भारत में रेल की शुरुआत की कहानी अमेरिका के कपास की फसल की विफलता से जुड़ी हुई है जहां 1840 के दशक में कपास की फसल को काफी नुकसान पहुंचा था। इसके कारण ब्रिटेन के मैनचेस्टर और ग्लासगो के कपड़ा कारोबारियों को वैकल्पिक स्थान की तलाश करने पर विवश होना पड़ा था। 1843 में लार्ड डलहौजी ने भारत में रेल चलाने की संभावनाएं तलाश करने की शुरुआत की और 1845 में कलकत्ता में ग्रेट इंडियन पेनिनसुला रेल कंपनी की स्थापना हुई।

भारत में रेल के संचालन में मद्रास के सिविल इंजीनियर एपी कॉटन का महत्वपूर्ण योगदान रहा। 1850 में इस कंपनी ने मुंबई से ठाणे तक रेल लाइन बिछाने का काम शुरू किया। एशिया और भारत में प्रथम रेल यात्रा 16 अप्रैल 1853 को दोपहर 3.30 बजे बोरीबंदर (छत्रपति शिवाजी टर्मिनस) से प्रारंभ हुई।

रेलवे के दस्तावेज के अनुसार 16 अप्रैल 1853 को मुम्बई और ठाणे के बीच जब पहली रेल चली, उस दिन सार्वजनिक अवकाश था। लोग बोरीबंदी की ओर बढ़ रहे थे, जहां गर्वनर के निजी बैंड से संगीत की मधुर धुन माहौल को खुशनुमा बना रही थी। साढ़े तीन बजे से कुछ पहले ही 400 विशिष्ट लोग ग्रेट इंडियन पेनिनसुला रेलवे के 14 डिब्बों वाली गाड़ी में चढ़े। रेलगाड़ी को ब्रिटेन से मँगवाए गए तीन भाप इंजन सुल्तान, सिंधु और साहिब ने खींचा। 20 डिब्बों में 400 यात्रियों को लेकर यह गाड़ी रवाना हुई। इस रेलगाड़ी ने 34 किलोमीटर का सफर सवा घंटे में तय किया और सायं 4.45 बजे ठाणे पहुंची।

भारत में 1856 में भाप के इंजन बनना शुरू हुए। इसके बाद धीरे-धीरे रेल की पटरियाँ बिछाई गईं। पहले नैरोगेज पर रेल चली, उसके बाद मीटरगेज और ब्रॉडगेज लाइन बिछाई गई। 1 मार्च 1969 को देश की पहली सुपरफास्ट ट्रेन ब्रॉडगेज लाइन पर दिल्ली से हावड़ा के बीच चलाई गई। इसका नाम राजधानी एक्सप्रेस रखा गया। 15 नवंबर 1985 को दिल्ली में भारत का सर्वप्रथम कम्प्यूटरीकृत आरक्षण केंद्र स्थापित हुआ। 2003 में दिल्ली-अमृतसर शताब्दी एक्सप्रेस को परीक्षण के तौर पर बायोडीजल से चलाया गया।

अंग्रेजों ने भारत में रेल सेवा की शुरुआत 16 अप्रैल 1853 को अपनी प्रशासनिक सुविधा के लिए की थी लेकिन 160 वर्ष बाद करीब 16 लाख कर्मचारियों, प्रतिदिन चलने वाली 11 हजार ट्रेनों, 7 हजार से अधिक स्टेशनों एवं करीब 65 हजार किलोमीटर रेलमार्ग के साथ भारतीय रेल आज देश की जीवनरेखा बन गयी है। जो सफर 1853 को प्रारंभ हुआ, वह अब विश्व में द्वितीय तथा एशिया में पहले स्थान पर आ चुका है।

भारतीय रेलवे का नेटवर्क दुनिया में अमेरिका, रूस और चीन के बाद चौथा सबसे बड़ा है।

Source – News 18

   
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