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नई रेल लाइन परियोजना पूरा होने से बढ़ेगा पर्यटन उद्योग, क्षेत्र का होगा विकास

April 22, 2019, 11:14 AM
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महात्मा बुद्ध व भगवान महावीर की पावन भूमि वैशाली से गांधी की कर्मभूमि चंपारण को जोडऩे के लिए रेलवे लाइन का निर्माण होने से पर्यटन उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। एक बड़ी आबादी को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे। बैरिया में ऑटो-रिक्शा कर्मचारी संघ कार्यालय में आयोजित चुनावी चौपाल में हाजीपुर-सुगौली रेल मार्ग के निर्माण पर आयोजित चर्चा में संघ के महासचिव इलियास इलू ने कहा कि काफी समय पूर्व हाजीपुर-सुगौली रेलमार्ग की नींव पड़ी थी। उसको बहुत पहले तैयार हो जाना चाहिए था। समय बढऩे से निर्माण खर्च बढ़ रहा है।

इलू ने कहा कि सरकारी जमीन रहते बैरिया गोलंबर के पास सामूहिक शौचालय का निर्माण नहीं हो रहा है। इस पर सरकार की नजर होनी चाहिए। चाणक्य विद्यापति सोसायटी के संरक्षक पंडित शंभूनाथ पाठक ने चुनावी चर्चा को आगे बढ़ाते हुए कहा कि वैशाली भगवान बुद्ध की पावन भूमि के साथ भगवान महावीर की जन्मभूमि है। वैशाली, बासोकुंड के आसपास कई ऐतिहासिक धरोहर हैं जहां दर्शन करने नियमित पर्यटक आते रहते हैं। अगर यह स्थान रेल मार्ग से जुड़ जाता है तो पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

भगवान महावीर की जन्मभूमि बासोकुंड में यदि स्टेशन का निर्माण हो जाता है तो यहां आने वाले बाहरी पर्यटकों को कम परेशानी होगी। 2004 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने हाजीपुर-सुगौली रेलमार्ग की नींव रखी थी। इस रेलवे मार्ग से वैशाली, मुजफ्फरपुर, पूर्वी व पश्चिम चंपारण को एक साथ जोडऩे का लक्ष्य है। 2004 से अबतक यानी 15 साल हो गए, लेकिन यह महत्वाकांक्षी योजना पूरी नहीं हुई।

इनकी रही भागीदारी

समाजसेवी केशव चौबे, ऑटो-रिक्शा यूनियन के प्रवीण कुमार झा उर्फ पप्पू झा, चन्द्रभूषण झा, राजेश कुमार, मृत्युंजय कुमार, नीतीश कुमार, एकराम अहमद, गनौर साह आदि शामिल रहे।

रेलवे लाइन बनने से पिछड़े इलाकों का विकास होगा: प्रदेश अध्यक्ष

बिहार मोटर ट्रांसपोर्ट फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष उदय शंकर प्रसाद सिंह ने कहा कि रेलवे लाइन बनने से पिछड़े इलाकों का विकास होगा। जो इलाका रेल व सड़क मार्ग से जुड़ता है, उसका विकास होना तय है। वैशाली का इलाका ऐतिहासिक है और उसको अविलंब ट्रेन से जोड़ा जाए। पर्यटकों को आने में सुविधा होगी और सरकार को काफी राजस्व मिलेगा।

Source – Jagran

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