लखनऊ से आनंद विहार के बीच लीजिए एक बार फिर डबल डेकर एक्सप्रेस का मचा, आज से सुविधा शुरू

April 17, 2019, 11:56 AM
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साढ़े चार माह बाद लखनऊ-आनंद विहार के बीच चलने वाली डबल डेकर एक्सप्रेस बुधवार से चलनी शुरू हो जाएगी। इसके अलावा रेल प्रशासन ने सात ट्रेनों के निरस्त करने की तारीख बढ़ाकर 30 अप्रैल कर दी है।

रेल प्रशासन ने एक दिसंबर से 15 फरवरी तक कोहरे के कारण 24 ट्रेनों को निरस्त कर दिया था। बाद में रेल लाइन मरम्मत के नाम पर इन ट्रेनों को 31 मार्च तक निरस्त रखा गया था। आठ ट्रेनों को छोड़कर पहली अप्रैल से शेष ट्रेनें चलनी शुरू हो गईं थीं। इन आठ ट्रेनों को रेल लाइन की मरम्मत व कोयले की ढुलाई के लिए 15 अप्रैल तक निरस्त किया गया था। मंगलवार को उत्तर रेलवे मुख्यालय ने डबल डेकर ट्रेन को चलाने के आदेश जारी कर दिए। ट्रेन बुधवार से चलेगी, जबकि सात ट्रेनों को 30 अप्रैल तक निरस्त कर दिया गया है।

ये ट्रेनें रहेंगी निरस्त

मुख्यालय के आदेश के अनुसार मेरठ-लखनऊ के बीच चलने वाली राज्यरानी एक्सप्रेस, नई दिल्ली-मालदा टाउन के बीच चलने वाली एक्सप्रेस, बरौनी-अंबाला के बीच चलने वाली हरिहर नाथ एक्सप्रेस, अमृतसर-जयनगर के बीच चलने वाली शहीद एक्सप्रेस, आनंद विहार-सियालदाह के बीच चलने वाली एक्सप्रेस, अमृतसर-हावड़ा के बीच चलने वाली डुप्लीकेट पंजाब मेल को 30 अप्रैल तक निरस्त कर दिया है। माना जा रहा है कि पहली मई से राज्यरानी एक्सप्रेस चलनी शुरू हो जाएगी। कोयले की ढुलाई व रेल लाइन की मरम्मत के लिए छह ट्रेनों को 15 मई तक निरस्त किया जा सकता है।

मंडल रेल प्रबंधक अजय कुमार सिंघल ने बताया कि मुख्यालय के आदेश पर डबल डेकर बुधवार से चलनी शुरू हो जाएगी। सात ट्रेनों को 15 दिन के लिए निरस्त कर दिया है।

अब रेलवे खुद बनाएगा रेलवे ट्रैक

रेलवे प्रशासन अब रेलवे ट्रैक के लिए स्टील फैक्ट्री पर निर्भर नहीं होगा, बल्कि ट्रैक का निर्माण खुद करेगा। उत्तर भारत में रेलवे लाइन निर्माण में प्रयोग किये जाने वाले गार्डर की आपूर्ति करने से लिए रोजा में प्लांट लगाने का काम तेजी से शुरू कर दिया है। निर्माण के बाद मंडल के सभी जर्जर व पुराने ट्रैक को बदलने का काम तेजी से किया जाएगा।

रेलवे गार्डर का निर्माण सरकारी स्टील फैक्ट्री भिलाई में किया जाता है। गार्डर का निर्माण दो चरणों में किया जाता है। पहले चरण में लोहे को गला कर छह मीटर की पटरी तैयार की जाती है, फिर रेल लाइन का आकार देकर 260 मीटर लंबा बनाया जाता है। दूसरे चरण के निर्माण में काफी समय लग जाता है। इसलिए मांग के अनुरूप रेल लाइन की आपूर्ति नहीं हो पाती है। इससे पुराने व जर्जर ट्रैक को लक्ष्य के अनुरूप बदला नहीं जाता है। इसलिए ट्रेनों की गति नहीं बढ़ पा रही है।

उदाहरण के लिए मुरादाबाद रेल मंडल में 1402 किलो मीटर रेल लाइन है। उसमें 50 फीसद से अधिक रेल लाइन पुरानी है। पिछले साल रेल लाइन बदलने का लक्ष्य साढ़े तीन सौ किलोमीटर था, अभाव में दो सौ किलो मीटर रेल लाइन बदली गयी। यह स्थिति देश के सभी रेल मंडल की है।

रेलवे इस समस्या के समाधान के लिए रोजा फैक्ट्री स्थापित कर रहा है, जहां से उत्तर भारत के लिए रेल लाइन की आपूर्ति होगी। फैक्ट्री का निर्माण दिसंबर तक पूरा हो जाएगा और जनवरी से रेल लाइन का निर्माण शुरू हो जाएगा। रेल लाइन निर्माण के लिए प्राइवेट एजेंसी नामित की गई है।

मंडल रेल प्रबंधक अजय कुमार सिंघल ने बताया कि रोजा में रेल लाइन के निर्माण के लिए फैक्ट्री बन रही है। इसके बाद पुरानी व जर्जर रेल लाइन बदलने का काम तेजी से किया जाएगा।

Source – Jagran

   
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