40 साल पुराना हेरिटेज इंजन बढ़ाएगा टाटा स्टेशन की शोभा

February 17, 2019, 12:46 PM
Share

40 वर्ष पुराने मॉडल रेल इंजन (140 टन वजनी) को टाटानगर स्टेशन के पार्सल विभाग के सामने स्थापित किया जाएगा। यह एक हेरिटेज लोको इंजन है। स्टेशन की शोभा बढ़ाने के लिए इसे प्रदर्शन के उद्देश्य से रखा जा रहा है।

इस इंजन को टाटानगर में स्थापित करने के लिए 17 फरवरी को सुबह आठ बजे से शाम चार बजे तक इन गेट से यात्रियों का आना-जाना पूरी तरह से बंद रहेगा। इस दौरान यात्री स्टेशन के आउट गेट से आएंगे और आउट गेट से ही बाहर निकल जाएंगे।इस इंजन को लाने में टाटा-जुगसलाई सड़क मार्ग में अवरोध ना हो इसके लिए रेलवे की ओर से शनिवार की रात 10.30 बजे बजे बाद दो ट्रेलर व दो क्रेन की मदद से इंजन को टाटानगर लोको साइड से इन गेट से प्रवेश करा कर पार्सल विभाग के सामने बनी पटरियों पर रखा जाएगा। लोको शेड में लगे इस इंजन को शुक्रवार को ही डिस्मेंटल कर दिया गया है।

इंजन रखने के बाद होगी साज-सज्जा

इंजन लाने में किसी तरह की परेशानी ना हो इसके लिए रास्ते में पड़ने वाले होटल के शेड को हटाने, पेड़ की टहनियों को काटने से लेकर बिजली के तारों को और ऊंचा करने का निर्देश भी जारी कर दिया गया है। रेलवे के सीनियर डीईई, क्षेत्रीय प्रबंधक, स्टेशन निदेशक, एइएन समेत इंजीनियिरंग विभाग के 13 अधिकारियों के देख-रेख में लगेगा हेरिटेज लोको इंजन टाटानगर में लगाया जाएगा। इंजन के चारों तरफ लोहे के ग्रिल से घेरा बनाया जाएगा वहीं इंजन को यहां रखने के बाद इसकी सज्जा की जाएगी

रेल लाइन बिछाई गई : मॉडल इंजन स्थापित करने के लिए स्टेशन में 23 मीटर लंबा व पांच मीटर चौड़ी ढलाई कर पिच तैयार किया गया है। इसके बाद रेलवे ने उसके ऊपर रेल लाईन बिछाई।

रेलकर्मियों को शीघ्र मिलेगा आवास भत्ता

मेंस कांग्रेस और रेल प्रशासन के बीच नॉन पेमेंट की बैठक पांच वर्षो के बाद रेल प्रबंधक के सभागार में हुई। बैठक का आयोजन वेतन विसंगतियों को लेकर किया गया था। इसमें सहमति बनी कि चक्रधरपुर मंडल के सभी खंडों में कार्यरत कर्मचारियों का आवास भत्ता जल्द शुरू हो जाएगा। इसके साथ ही एक्ट अप्रेंटिस में प्रशिक्षण ले रहे कर्मचारियों का पिछले चार माह से बंद वेतन एक सप्ताह में शुरू कर दिया जाएगा। झाड़सुगड़ा, राउरकेला और बंडामुंडा के रनिंग कर्मचारियों का 14.29 प्रतिशत आवास भत्ता का एरियर 19 मई तक देने पर सहमति बनी है। बैठक  दो घंटे चली।

Source – Jagran

   
Disclaimer: Disclaimer: The Information, News, Videos, Articles, and other content provided on this platform have been collected, compiled, or referenced from various sources available in the public domain. We believe that “Knowledge Is Power” and our aim is to create general awareness among people and make useful information easily accessible to everyone. While we make reasonable efforts to present information accurately and responsibly, we do not guarantee that all information, news, videos, or other content published on this platform is complete, current, or free from errors. Users are advised to independently verify important information from official or authoritative sources before relying upon it or taking any action based on it. NOTE: The content on this platform is intended for general information and awareness purposes only and should not be considered as professional, legal, financial, medical, or official advice. Knowledge Hub Information Center does not assume responsibility for any loss, damage, or consequence arising from reliance on information published on this platform.
Share

This entry was posted in Historical - Railway, General

General - Public

Raipid Rail क्या है? कैसे बदलेगा शहरों का भविष्य | Delhi-Meerut RRTS पूरी जानकारी

view all>>